जो ना माने सयानों की सीख…

महाराष्ट्र की राजनीति ने आज फिर से ‘आधी छोड़ एक को धाये, आधी बची न पूरी पाये’ वाली पुरातन कहावत को चरितार्थ कर दिया!

३७० तो बहाना है

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कश्मीर को लेकर १९४९ में, केवल राष्ट्रपति के आदेश से, भारतीय संविधान में जोड़ी गयी धारा ३७० के कुछ अंश संवैधानिक विधि-विधान पूर्वक हटा क्या लिये गये; कुछ लोगों के लिये जैसे साक्षात्‌ महा-प्रलय ही घट गया! इस जमात का प्रत्येक मोहरा टिटहरी की तर्ज पर आसमान की ओर पैर किये पड़ा दिन-रात टिटहरा रहा है। Continue reading

महाकाली की कथा सिखाती है गांधी की अहिन्सा का पूरा दर्शन

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कथित ‘औसत समझ’ के उलट, महाकाली आदमी और आदमीयत को केन्द्र में रखने वाला प्रतीक है। और, महाकाली की गाथा में ही अहिन्सा का गांधी-वादी आदर्श अपनी पूर्णता में निखरता है। Continue reading

नये सिरे से लिखना होगा भारतीय संविधान

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भारतीय संविधान के लिखे, स्वीकार किये और लागू किये जाने की प्रक्रिया के वैधानिक रूप से खोट-पूर्ण होने को स्वीकारने और इस कारण से समूची प्रक्रिया को नये सिरे से पुन: पूरा करने से कोई ऐसा महा-प्रलय नहीं आने वाला है जो सम्प्रभु भारत राष्ट्र के भौतिक और / अथवा प्रशासनिक अस्तित्व को हल्की सी खरोंच तक लगा पाये। Continue reading

म० प्र० राज्य सूचना आयोग की खुली पोल

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म० प्र० राज्य सूचना आयोग आयोग पर बड़ा सवाल उठा है। गैर सरकारी सामाजिक संगठन सजग ने मुख्य सूचना आयुक्त से ही पूछ लिया है कि क्या आयोग स्वयं को देश के समस्त नियमों, कायदों, कानूनों, स्थापित व्यवस्थाओं और मर्यादाओं से ऊपर मानता है? Continue reading

म० प्र० राज्य सूचना आयोग का काला सच

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जो सूचना आयोग सरकारी तन्त्र में सम्पूर्ण पार-दर्शिता स्थापित करने की इकलौती जिम्मेदारी के लिए गठित हुआ है, वह स्वयं न केवल घोर अ-पारदर्शी है अपितु अ-पारदर्शिता को बढ़ावा देने के नित नये हथ-कण्डे खोजने में भी जुटा है। आयोग ने तो अधिनियम का दुरुपयोग करना तक सीख लिया है। Continue reading

खेसारी की खेती को कानूनी मंजूरी का मतलब जन-स्वास्थ्य से छलावा

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खेसारी का जहर नये सिरे से फन उठा रहा है। इसे कुचलना ही होगा। नहीं तो, ऐसा अनर्थ होगा जिससे मुक्ति की कोई राह कभी नहीं ढूँढ़ी जा सकेगी। एक अनर्थ को रोक सकने की तन्त्र की असमर्थता उस अनर्थ को सामाजिक और कानूनी मान्यता देने की अपनी बद-नीयती को जायज कैसे ठहरा सकती है? Continue reading

फिर से फन उठाता खेसारी का जहर

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आधी-अधूरी और अपुष्ट सूचनाएँ उपलब्ध करा खेसारी दाल की खेती को कानूनी मान्यता देने की खबर है। खबर के साथ सोचे-समझे कुतर्क फैलाये जा रहे हैं। खेसारी से जिनके व्यापारिक स्वार्थ जुड़े हैं उनके द्वारा भी, कुछ तथा-कथित कृषि-विज्ञानियों द्वारा भी और शासन-प्रशासन तन्त्र से जुड़े निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा भी। Continue reading