September 2010 archive

पॉज़िटिव थिंकिंग मेक्स वन पॉज़िटिव

Fourth Pocket

असली पॉज़िटिव टिप है कि यह समझा जाये कि कैसे माइनस और माइनस को मिला देने से सब कुछ प्लस में बदल जाता है? इतना समझा नहीं कि पूरा जहां परफ़ेक्ट पॉज़िटिव क्लाउड की छत्र-छाया में आ जायेगा। Continue reading

एक प्याली चाय का वज़न

Fourth Pocket

मियाँ खबरों की किस सदी में जीते हो? मैं तो प्रणव दा की उस एक प्याली चाय का असली ‘वज़न’ पूछ रहा था जिसे पिला कर उन्होंने, क्या बीजेपी और क्या वाम-पंथी, सभी को एक साथ साध लिया था! Continue reading

धर्म-निरपेक्षता का आडम्बर

Sarokar

धर्म-निरपेक्षता का सोच अप्राकृतिक है क्योंकि यह अपने-अपने वैयक्‍तिक स्वार्थों को फलीभूत करने के सोच से उपजा आडम्बर है। दुर्भाग्य से, हम ऐसे गुरुजनों से वञ्‍चित होते जा रहे हैं जो समाज, समुदाय और सम्प्रदाय में भेद करने लायक शिक्षा दे सकें। Continue reading

सूट करती हैं, सूट नहीं करती हैं

Fourth Pocket

सारा दोष पोथी-पण्डितों का था। कन्फ़्यूज़्ड करके रख दिया था भगवान को। जन्माष्‍टमी एक दिन पहले हो या एक दिन बाद! बैठा दी उसने अपनी पंचायत। पहले तय किया जाये कि मेरा हैप्पी बर्थ डे आखिर कब है? Continue reading

कुछ-कुछ पच नहीं रहीं ये बातें

Fourth Pocket

बात कुछ हजम नहीं हो रही है। कोई संकेत कर रहा है कि केन्द्रीय मुख्य सूचना आयुक्‍त की रिटायर-मेण्ट की तारीख बिल्कुल नजदीक आ गयी है। तो, कोई समझाने की कोशिश कर रहा है कि इसे महज फ़्रस्टेशन मान कर भूल जाइये। Continue reading