September 2011 archive

पिटना अगाड़ी और पिछाड़ी, दोनों से

यह अनुशासन-प्रेम नहीं, टेक्नीक का कमाल है। आगे बढ़े तो कुछ नहीं लेकिन रिवर्स लेते ही कीलें घुस जायेंगी। समझे? अफ़सरी के नशे में पिछाड़ी चलाना खुद को तो डुबोयेगा ही, पिछली गाड़ी को भी ठोक देगा! Continue reading

तलाश एक अदद तेनालीराम की

आज की डेमोक्रेसी को एक अदद तेनालीराम की तलाश है। किसी पार्टी के पास तेनालीराम जैसी प्रतिभा का एक कारिन्दा नहीं है। जानते हों तो अपने-अपने पसंदीदा पार्टी आला-कमान हुजूरों को खबर करें। पुरस्कृत होंगे। Continue reading

यों मुस्कुरा कर तेरा हाथ जोड़ना!

चेयर पर बिराजी मोहतरमा ने जब शब्दों के आदेश से नहीं बल्कि दोनों हाथ जोड़ महज मुस्कुरा कर सदन स्थगित की और आडवानी को आगे एक भी लफ़्ज बोलने से रोका तब वह गुनगुना उठे होंगे — तेरा मुस्कुराना गजब ढा गया! Continue reading

हमारे कान में नील का डोरा!

निराश तो क्या होते, बाबू मोशाय नाराज हुए दिखने लगे। मीडिया में ढोल-नगाड़े पिटने लगे कि इशारों ही इशारों में हर हाईनेस को सन्देशा भिजवाया जा रहा है कि अब तो बालक की काबलियत की परीक्षा होकर रहेगी। Continue reading