December 2011 archive

कोर्ट जाकर साबित करो : हत्यारा कौन?

२९ दिसम्बर की मध्य रात्रि जो कुछ भी हुआ वह लोक-तन्त्र के प्रति किया गया निकृष्‍टतम अपराध था। आज जो कुछ होता दिख रहा है वह भी लोक-तन्त्र के प्रति किया जा रहा उतना ही जघन्य अपराध है।

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सुरूर की जुगाली

हैंग-ओवर यानि जली हुई रस्सी की ऐंठन। कहते हैं पार्लियामेण्ट की लोकपाल वाली स्टैण्डिंग कमेटी के मुखिया सिंघवी जब हर बैठक देर तक चलाने लगे तो लालू ने घोर ऐतराज जतलाया — वे सांसद्‌ हैं ग़ुलाम नहीं।

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आदत से लाचार

यूपीए प्रेसीडेण्ट और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया ने भ्रष्‍टाचार, विदेशों में काले धन या जुडीशरी, आरटीआई, जाँच एजेन्सियों और आयोगों के सशक्‍तिकरण जैसे मसलों को १५वीं लोक-सभा में एक बार भी नहीं उठाया!

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सुजान होते जड़मति

नेहरू खानदान ने सत्ता-सरोवर से जल-संग्रह करने के लिए अनेक रस्सियाँ नीचे डाली और ऊपर खींची हैं। लेकिन अनुभव और अभ्यास की कमी हमेशा आड़े आती रही। हालात अब बदले हैं प्रेक्‍टिस मेक्स मैन परफ़ेक्‍ट!

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किसका कितना दामन है?

वैश्‍विक दर्शन का एक सूत्र देने की अकुलाहट रोके नहीं रुक रही है। सूत्र की पैदाइश एक फिल्मी गीत से हुई है जो अपने समय में बड़ा पॉपुलर हुआ था। इसकी एक लाइन थी — जितना जिसका दामन था उतनी उसको सौगात मिली।

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