May 2012 archive

APPRECIATION

Atithi-Vichar

‘कृषि’ और ‘सूचना-प्रौद्योगिकी’ जैसे दो सुदूर कोनों को एक साथ साध कर देश और समाज के लिए कुछ कर पाने का सपना सँजोते अजय कुमार ((www.farmerswelfare.org)) ने नेशनल एण्डोन्मेण्ट फ़ॉर द ह्यूमेनिटीज़ (नेह) द्वारा प्रायोजित वार्षिक जैफ़रसन भाषण-माला के अन्तर्गत्‌ वेण्डेल ई बेरी ((Noted poet, essayist, novelist, farmer and conservationist.)) द्वारा २३ अप्रैल २०१२ को वाशिंगटन में दिये भाषण ((NEH 2012 Jefferson Lecture)) का लिपि-बद्ध स्वरूप भेजा है। Continue reading

ललित-लालित्य

Fourth Pocket

मजा ऐसे नटखट बच्चे की तरह है जो निगाह चूकते ही तफ़रीह पर चला जाता है। सार यह कि जैसे बच्चा पालना पड़ता है ठीक वैसे ही मजा भी पालना पड़ता है। ठीक वैसे ही जैसे जो खायेगा स्वाद भी उसी को आयेगा। मजा अन्‍तर्मुखी है — अन्दर है तो है, बाहर निकला तो कपूर की तरह काफूर! Continue reading

ऐसे मनो-नयन का औचित्य!

Sarokar

क्रिकेट की उपलब्धियाँ सचिन को चाहे जितनी राज-नैतिक सीढ़ियाँ चढ़ा दें, देश को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इन्हीं के सहरे वे चाहे जितने सम्मान कमा लें, देश को इस पर भी कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन संसद्‌ में बैठने की पात्रता तो संसदीय क्रिया-कलापों में योग-दान कर पाने की सम्भावना से ही आँकी जानी चाहिए। Continue reading