July 2012 archive

बदले-बदले सरकार नजर आते हैं!

Fourth Pocket

ओबामा भले ही बड़-बड़ाते फिरें कि इण्डियन्स बदले जमाने के कम्पल्शन्स को समझ नहीं रहे हैं लेकिन मैंने नोटिस किया है कि हमारे घाघ पॉलिटीशियन्स केवल नाम के ही नहीं बल्कि चरित तक के पक्के घाघ हो गये हैं। Continue reading

उल्‍टे बाँस बरेली को!

Fourth Pocket

उकसाये जाने पर भी मैं यह कहने को तैयार नहीं कि घबरा देने वाले ऐसे माहौल में ‘लोक-तन्त्र का गला घोंट देने’ का खुला आरोप झेल चुका शख़्स उतनी ही ताकत एक बार फिर से कब्जा सकता है। मैं तो बस यह सोच कर दु:खी हूँ कि बाँस के कन्साइन्मेण्ट्स उल्टे बरेली लौटने लगे हैं। Continue reading

राष्‍ट्रपति चुनाव पर जाल-साजी के बादल

Sarokar

संगमा की आपत्ति आरोप की जिस सीमा पर खड़ी है उसमें सम्भावित आपराधिक प्रकरण में क्योंकि प्रणव जाल-साजी के प्रकरण के सह आरोपी होंगे अपने सम्भावित निर्वाचन के बाद क्या राष्‍ट्रपति जी फौज-दारी मुकदमे में अपने को निर्दोष सिद्ध करने के लिए पूरी न्यायिक प्रक्रिया को व्यक्‍तिश: स्वयं झेलेंगे? Continue reading

औक़ात है तो दिखाओ!

Fourth Pocket

दूसरे को अपनी औक़ात साबित करने की चुनौती देना एक तरह की ‘औक़ात रि-गेनिंग’ टेक्‍टिस ही है। अपने दिग्गी भाई को भूले नहीं होंगे। कभी बड़े औकात-दार हुआ करते थे। आज-कल टीम अन्ना को धूर देते फिर रहे हैं कि औक़ात हो तो शिवराज के मुँह पर कालिख पोत कर दिखाओ! Continue reading