February 2013 archive

रचनात्मक भूमिका और संघर्ष

Sarokar

अपने जीवित रहने के अधिकार की माँग करते समय दूसरे के भी जीवित रहने के अधिकार को स्वीकार करना ही यथार्थ रचनात्मक भूमिका है। ऐसे विकेन्द्रीकृत समाज की कल्पना के कारण, जिसमें सभी की अपनी अलग पहचान तो हो परन्तु सभी एक हों, गांधी-विचार बहुधा दोनों खेमों की तीखी आलोचना के शिकार होते हैं। Continue reading

कानून नागरिक के लिए है, नागरिक कानून के लिए नहीं

Ateet Ka Jharokha

एक सहज सवाल है कि नजरें इतनी नीची करके कि वे बन्द सी ही बनी रहें, आखिर कब तक जिया जा सकेगा? सच है कि नागरिक को कानून के प्रति जिम्मेदार बनना पड़ेगा पर कानून की भी अपनी जिम्मेदारियाँ होती हैं कि नहीं? Continue reading