September 2013 archive

नकारने के अधिकार की सार्थकता

Sarokar

यदि कुल वैध मत-दान के पचास प्रतिशत्‌ से एक भी अधिक मत मत-दाताओं की यह इच्छा व्यक्‍त करने वाले हों कि उपलब्ध उम्मीदवारों में से एक में भी उनका प्रतिनिधि होने की योग्यता नहीं है तो न केवल उस चुनाव-विशेष को निरस्त किया जाना चाहिए बल्कि सभी उम्मीदवारों को आगामी छह सालों के लिए किसी भी चुनावी प्रक्रिया का प्रत्याशी होने से प्रतिबन्धित कर दिया जाना चाहिए। Continue reading

खुलासे का अपना खुलासा

Sarokar

यूपीए के रण-नीति कारों का अपराध अधिक गम्भीर इसलिए हो जाता है क्योंकि उनका वास्तविक लक्ष्य जनरल सिंह पर चोट करना नहीं है। उन्हें तो, मत-दान केन्द्रों तक अपने इस दुष्‍प्रचार को सही ठहराते जाना है कि भाजपा की ओर से नरेन्द्र मोदी को प्रधान मन्त्री पद का दावे-दार ठहराये जाने से देश में ‘साम्प्रदायिक’ ध्रुवीकरण होने का संकट गहरा गया है। Continue reading

थमा नहीं है गुजरात लोकायुक्‍त तमाशा

Sarokar

पद त्यागने की चिट्‍ठी के सार्वजनिक होने में नामित लोकायुक्‍त की निजी हिस्सेदारी कितनी थी, यह अनुसंधान का विषय हो सकता है किन्तु उसके प्रकाश में मेरी उत्सुकता पर उनकी गहरी चुप्पी पूरी गम्भीरता से संकेत दे रही है कि गुजरात लोकायुक्‍त का तमाशा अभी थमा नहीं है। किसी नये अध्याय का जल्दी ही खुलना बिल्कुल पक्का है। Continue reading