June 2014 archive

साँप भी मरे और लाठी भी न टूटे

Twarit

क्या रेल बजट से पहले अभी से ही भाड़े में इतनी ज्यादा बढ़ोत्तरी केवल इसलिए की गयी है ताकि जब रेल्वे में एफ़डीआई की योजना लागू हो जाये तब भाड़ा बढ़ा कर देश के हितों को चोट पहुँचाने के आरोप का टीका एफ़डीआई के माथे नहीं लगे और यह सरकार विदेशी पूँजी-निवेशकों के हाथों में देश-हित को गिरवी रख देने के गम्भीर आरोप से बची रह सके? Continue reading