July 2014 archive

राष्‍ट्र-भाषा हिन्दी के प्रति मीडिया का दायित्‍व

Bahas

पत्र-कारिता और मीडिया की सचाइयाँ परस्पर भिन्न हैं। यह भिन्नता इस व्यवहारिक सचाई से समझी जा सकती है कि ‘पत्र-कारिता’ की प्रतिष्‍ठा एक सामाजिक धर्म की रही है जबकि ‘मीडिया’ की आज की औसत पहचान पत्र-कारिता के सहारे व्यावसायिक हितों की पूर्ति करने वाले एक संस्थान के पर्याय की है। Continue reading

नीतियों के साथ नीयत की शुचिता भी दिखानी होगी

Twarit

मोदी-सरकार के पहले आम बजट पर सारे विरोधी एक सुर में चीख रहे हैं कि लॉली-पॉप स्वादिष्ट नहीं निकला। चुनाव की भीषण पराजय से अभी तक हाँफ रही कांग्रेस और उसकी क्वीन कह रही हैं कि बजट उनकी दु:ख-दायी प्रति-कृति भर है। दु:ख-दायी इसलिए कि उन्होंने मोदी से बड़ी-बड़ी आशाएँ की थीं! Continue reading

बहुत विस्तरित है ‘व्यापम’ घोटाले की आँच

Sarokar

कुख्यात हुए ‘व्यापम घोटाले’ को लेकर म० प्र० प्रदेश के पूर्व मुख्य मन्त्री दिविजय सिंह ने प्रदेश के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को जो पत्र लिखा न्यायालय ने उसे पत्र-याचिका के रूप में विचार के लिए स्वीकार लिया है। यों, पत्र में सरकारी तन्त्र पर बहुत गम्भीर प्रश्न हैं किन्तु न्यायालय की उँगली स्वयं उन पर भी उठ सकती है। Continue reading