February 2015 archive

आदर्श ग्राम पर आदर्श सवाल : ३

Sarokar

कुल मिला कर दो प्रकार के शोर गूँज रहे हैं। पहला औसत उथली समझ के व्यक्तियों के लिए है जबकि दूसरा तनिक ज्यादा बौद्धिक बहस-बाजों को समर्पित। किन्तु, विरोध के इन दोनों ही शोरों में एक दुर्भाग्य-जनक समानता है — दोनों ही कृषि-भूमि के अधिग्रहण के विरोधी नहीं हैं। सारा विरोध या तो वाजिब शर्तों के या फिर वाजिब दामों के निर्धारण पर सिमटा हुआ है। Continue reading