यह कैसी लोक अदालत?

Bahas

क्या यह सम्भव है कि दो पक्षों के बीच चल रहे किसी वैधानिक/न्यायिक विवाद की सुनवाई किसी लोक अदालत में उस स्थिति में भी पूरी कर ली जाये (और फैसला भी सुना दिया जाये) जब उस विवाद के अपीलकर्ता ने अपने प्रकरण की सुनवाई उस लोक अदालत में करने की सहमति दी ही नहीं हो?

जी हाँ, संविधान और न्याय की प्रतिष्ठा को बनाये/बचाये रखने के लिए संवैधानिक रूप से गठित कोई संगठन ऐसा भी कर सकता है!

भरोसा नहीं हो रहा है?

तो, मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग से पूछिये। उसने यह करिश्मा करके दिखाया है!

पड़ताल करेंगे तो यह भेद भी खुल सकता है कि आयोग ने इस लोक अदालत को आयोजित करने के लिए अपने अधिकृत होने की बन्धन-कारी प्रक्रिया भी पूरी नहीं की थी!

(०२ जुलाई २०१५)