Jyoti Prakash

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आदर्श ग्राम पर आदर्श सवाल : १

Sarokar

सच में ही एक छोटे से आदर्श की स्थापना से उसके दोहराव की सम्भावना स्वत: ही उत्पन्न हो जाती है। इसलिए ‘प्लान मोदी’ की वास्तविक सफलता योजना के इस मूल्यांकन पर निर्भर होगी कि सांसद आदर्श ग्राम योजना में ‘ग्राम’ भी और ‘आदर्श’ भी कहाँ है? और अगर कहीं है तो, यथार्थ में, कितना है? योजना की समीक्षा इसी धुरी पर केन्द्रित होनी चाहिए। Continue reading

क्या भोपाल में सायनाइड बम का परीक्षण किया गया था?

Ateet Ka Jharokha

क्या संयन्त्र में भण्डारित रसायनों की भूमिका केवल घोषित उपयोग तक ही सीमित थी? या फिर षडयन्त्र-कारियों ने इन रसायनों के अपने स्वतन्त्र प्रभावों के अध्ययन की भी सम्भावना सोच रखी थी? और इसीलिए, टेक्सास स्थित अमरीकी सरकारी संस्थान ‘डिसीज कण्ट्रोल सेण्टर’ ने भोपाल टेलेक्स सन्देश भेज कर इलाज-विशेष का लम्बा-चौड़ा नुस्खा सुझाया था? Continue reading

किसके साथ, किसका विकास?

Atithi-Vichar

आईएसएम, धनबाद से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में एमटेक और छत्तीसगढ़ कृषक बिरादरी के संयोजक प्रदीप शर्मा ने अपना एक आलेख हमें भेजा है। विषय-वस्तु की सर्व-कालीन सम-सामयिकता के कारण ही, रविवार डॉट कॉम में प्रकाशित हो चुके इस आलेख को मैं (किंचित्‌ सम्पादन के साथ) यहाँ स्थान दे रहा हूँ। Continue reading

किसे नहीं जरूरत संयम की?

Ateet Ka Jharokha

यह सही हो सकता है कि अतीत में मतदाता राजनैतिक चालबाजों के झाँसे में आ गया हो। ऐसा आगे भी हो सकता है। लेकिन मुद्दों को समझने, और उन्हें तय करने का भी, मतदाता का अधिकार उससे केवल इस सोच के आधार पर छीना नहीं जा सकता कि वह अन-पढ़ या कि गँवार है, और इसलिए, इतना ना-समझ है कि सहजता से बरगलाया जा सकता है। Continue reading

दायित्व को निभाने की बारी अब राष्ट्र की

Sarokar

पीड़ित किसानों को तो यह भी पता नहीं है कि राहत के लिए आवश्यक बना दिया गया उनका दावा आगे बढ़ेगा भी या राजस्व कर्मचारियों, या फिर, सेवा सहकारी समितियों के पदाधिकारियों की मंशा की बलि चढ़ जायेगा। उन्हें प्रतीक्षा है कि कोई न कोई पहल करे और राहत-प्रदाय के उनके निवेदनों को शासन तक पहुँचाये। Continue reading

डॉक्टर गलत परन्तु ज्योतिषी ठीक!

Twarit

उद्धृत खबर सही हो या गलत, समाचार-पत्र में प्रकाशित टिप्पणी समाज को भटकाव के जोखिम की चौखट पर खड़ा कर रही है। क्योंकि करने वाला नहीं, करने वाले की नीयत ही तय करती है कि कोई कर्म उचित है अथवा अनुचित। प्रकाशित हुई खबर का खण्डन कितनी निगाहों से गुजरेगा? समाज का सारा का सारा असमंजस इसी एक बिन्दु पर केन्द्रित है। Continue reading

मौसमी आपदा केवल किसानों की नहीं, समूचे राष्ट्र की आपदा है

Sarokar

धीरे-धीरे ही सही, सामूहिक समझ का दायरा व्यापक करते हुए किसी ठोस हल की ओर पूरी सामूहिकता के साथ कदम आगे बढ़ें क्योंकि खेतों के भविष्य पर छाया संकट केवल किसानों की नहीं अपितु समूचे राष्ट्र की आपदा है। एक बार यह समझ साफ हो जाये तो दिखलायी देने लगेगा कि खेतों के प्रति सरकारों का यथार्थ दायित्व क्या हो? और, समाज का भी। Continue reading

Homoeopathy, Molecular Strain Theory, Mythology & Quantum theory

Ateet Ka Jharokha

Out of all available scientific studies, quantum theory seems to have the potential to explain the intricacies involved with Hahnemannian Science. It may enable modern science to understand the mode through which the ‘Bio Prone’ media carries the ‘Drug Information’ in a true homoeopathic dose. Other schools of science lack the relevant tools.

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