Category: त्वरित

‘कुत्ता-न्याय’

जानते हैं, तेज रफ़्तार निकलते वाहनों के पीछे सड़क के कुत्ते ऐसे क्यों भौंकते-दौड़ते हैं जैसे ड्राइवर को काट कर ही छोड़ेंगे? दरअसल, उनमें से किसी ना किसी के किसी ना किसी नातेदार को तेज रफ़्तार वाहनों ने कुचल कर मारा हुआ होता है।

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डॉक्टर गलत परन्तु ज्योतिषी ठीक!

उद्धृत खबर सही हो या गलत, समाचार-पत्र में प्रकाशित टिप्पणी समाज को भटकाव के जोखिम की चौखट पर खड़ा कर रही है। क्योंकि करने वाला नहीं, करने वाले की नीयत ही तय करती है कि कोई कर्म उचित है अथवा अनुचित। प्रकाशित हुई खबर का खण्डन कितनी निगाहों से गुजरेगा? समाज का सारा का सारा …

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नीतियों के साथ नीयत की शुचिता भी दिखानी होगी

मोदी-सरकार के पहले आम बजट पर सारे विरोधी एक सुर में चीख रहे हैं कि लॉली-पॉप स्वादिष्ट नहीं निकला। चुनाव की भीषण पराजय से अभी तक हाँफ रही कांग्रेस और उसकी क्वीन कह रही हैं कि बजट उनकी दु:ख-दायी प्रति-कृति भर है। दु:ख-दायी इसलिए कि उन्होंने मोदी से बड़ी-बड़ी आशाएँ की थीं!

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बहुत विस्तरित है ‘व्यापम’ घोटाले की आँच

कुख्यात हुए ‘व्यापम घोटाले’ को लेकर म० प्र० प्रदेश के पूर्व मुख्य मन्त्री दिविजय सिंह ने प्रदेश के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को जो पत्र लिखा न्यायालय ने उसे पत्र-याचिका के रूप में विचार के लिए स्वीकार लिया है। यों, पत्र में सरकारी तन्त्र पर बहुत गम्भीर प्रश्न हैं किन्तु न्यायालय की उँगली स्वयं …

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साँप भी मरे और लाठी भी न टूटे

क्या रेल बजट से पहले अभी से ही भाड़े में इतनी ज्यादा बढ़ोत्तरी केवल इसलिए की गयी है ताकि जब रेल्वे में एफ़डीआई की योजना लागू हो जाये तब भाड़ा बढ़ा कर देश के हितों को चोट पहुँचाने के आरोप का टीका एफ़डीआई के माथे नहीं लगे और यह सरकार विदेशी पूँजी-निवेशकों के हाथों में …

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