Category: फ़ोर्थ पॉकेट

बरदाश्‍त की हद

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ताकि सनद रहे और वक़्त पर काम आये, एक बात साफ़ कर दूँ कि ख़यालों की मेरी टोकरी में, यूपी इलेक्शन में झेली इतनी बुरी हार की फ़ाइनल एनालिसेज़ के बाद, कांग्रेसी बेगम-हुजूर के आये उस रिएक्शन का आधा परसैण्ट भी नहीं था कि अनुशासन-हीनता कतई बरदास्‍त नहीं की जायेगी! Continue reading

जितने बीरबल, उतनी ही हाँडियाँ

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लोकपाल की निरर्थकता पर अपने ख़यालात पब्लिक करके मिसाइल-मैन ने भी एक टेस्ट-फ़ायर किया है। इससे पहले वह कह चुके थे कि अपने कैण्डिडेचर पर समय आने पर ही मुँह खोलेंगे। गोया, रत-जगे का निचोड़ महज इतना है कि जितने बीरबल होंगे, हाँडियाँ भी तो उतनी ही होंगी! Continue reading

ललित-लालित्य

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मजा ऐसे नटखट बच्चे की तरह है जो निगाह चूकते ही तफ़रीह पर चला जाता है। सार यह कि जैसे बच्चा पालना पड़ता है ठीक वैसे ही मजा भी पालना पड़ता है। ठीक वैसे ही जैसे जो खायेगा स्वाद भी उसी को आयेगा। मजा अन्‍तर्मुखी है — अन्दर है तो है, बाहर निकला तो कपूर की तरह काफूर! Continue reading

चौथा बनाम पाँचवाँ : किसकी होगी जय?

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रात तो बेकार गयी लेकिन सिर पर तपते सूरज ने ज्ञान-प्रकाश भर दिया। समझ गया कि कुछ सिर-फिरे ‘पब्लिक’ नाम का यह जो पाँचवाँ मिसिंग पाया खड़ा करने की जुर्रत कर रहे हैं, वह नये सिरे से स्टेबिलिटी देगा। पाँचों पाये एक साथ टिकें न टिकें, तीन पाये तो जमीन पर टिकेंगे ही टिकेंगे। Continue reading

तैयारी अपनी-अपनी

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भारत में पहले कहा जाता था ‘जहाँ न जाये रवि, वहाँ जाये कवि’। लेकिन, सूरज की रोशनी और शायर की काबलियत का यह ईक्वेशन इण्डिया में अब खारिज हो गया है। अब प्रसिद्ध है कि ‘जहाँ न मिलती हो परमीशन, पाओ उसको करके ऑफ़र कमीशन’। Continue reading

मुँह की खिलाने वाले

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कमलनाथ ने गजब ढा दिया! कह बैठे कि एमपी में भ्रष्‍टाचार का जो नेटवर्क है वह सैण्ट्रल एड का ४० फ़ी-सदी तक डकार जाता है। गोया, बीजेपी को बेहतर रूलर होने का तमगा मिल गया। न कमलनाथ अकेले हैं और ना एमपी इकलौता सूबा। ऐसी लीडरी के होते कांग्रेस जीत चुकी जनरल इलेक्शन्स। Continue reading

मरोड़ना कान गधैया के

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लीकेज की एन्क्वायरियों ने ममला हॉच-पॉच कर दिया है। गोया, हिन्दी के उस उलाहने ने उनकी नींद उड़ाई थी जिसने बरसों पहले ही गठ-बन्धन की बे-चारगी को बड़ी नफ़ासत से पेश कर दिया था — गधे से नहीं जीते तो गधैया के कान मरोड़ डाले! Continue reading

सब कुछ फ़िक्स है, भारत!

बन्दा जब तोप से पिटा था तब तो फ़ेमिली के लिए कुछ-कुछ गुञ्जाइश बचा पाया था। लेकिन ट्रक का हमला, लगता है, लास्ट पंच साबित होगा। यों, फेमिली पुराने चावल की मानिन्द परफ़ैक्‍ट टंच है। रास्ते निकाल ही लेगी। Continue reading