Category: फ़ोर्थ पॉकेट

तिनका-दर्शन!

“तिनके की असली महत्ता डूबते का सहारा बनने में नहीं, चोर की दाढ़ी में अटक जाने में है।” आगे न उन्होंने कुछ कहा और न मैंने। बस, एज़ आलवेज़, कॉम्प्रोमाइज़ का एक मासूम सा फ़ार्मूला लिखा गया दोनों पार्टियों के बीच। Continue reading

(ना) जियो जी भर के!

वह रुखसत हुआ और दिमाग ठण्डा हुआ तो ध्यान आया कि ‘जियो, जी भर के’ वाला फार्मूला यूनिवर्सल लॉ नहीं है। नहीं, त्रिवेदी के रेजिग्नेशन की खबर सुन कर नहीं कह रहा हूँ। दरअसल, मुझे एक कॉमर्शियल एड याद आ गया। Continue reading

दिल के अरमां बह गये

गली-गली में एक ही गाना गूँज रहा है — दिल के अरमां आँसुओं में बह गये। होली के हुड़-दंगिए ने बड़ी दिलचस्प चुटकी कसी। बोला, जीतने वाला हारे हुओं को चिढ़ा रहा है तो हारा हुआ अपना ग़म ग़लत करने में जुटा है। Continue reading

तेल और तेल की धार!

वह ऊँट के किसी दूसरी करवट बैठने का जोखिम उठाने को लेकर डरा हुआ है। ख़ौफ़ इतना कि बिरादरी के किसी उत्साही लाल ने कोई साइड लेने के यदि संकेत भी दिये तो बुजुर्गों ने उस बन्दे को ही डिस-ओन कर दिया। Continue reading

अनोखी टीआरपी

एक पुराना उलाहना है — न नौ मन तेल होगा और न राधा नाचेगी। गोया, सब कुछ भगवान भरोसे! भगवान का यह भरोसा बहुत पुख़्ता है। इसे इस तरह भी देखा जा सकता है कि आज के समय में भगवान की टीआरपी लगातार बढ़त पर है। Continue reading

किसमें कितना है दम!

दिग्गी ने कहा जरूर है कि वे पार्टी आला-कमान से इजाजत लेकर ही हिन्दुओं के उस जलसे में गये थे लेकिन इस फोटो काण्ड ने उनकी अपनी पर्सनल दम-ख़म की कलई तो उतारी ही पार्टी की दम-ख़म का भी फालूदा बना दिया है।

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जीत और हार!

‘हार-जीत’ के गेम में ‘ड्रॉ’ का कोई स्कोप नहीं। लेकिन, खुदा न ख़ास्ता टाई की नौबत आ जाए तो क्वाइन उछाल कर या फिर किसी प्रिव्हिलेज्ड वीटो के सहारे, दिस वे ऑर दैट, हार-जीत की पर्ची टिका ही दी जाती है।

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ये भी तीतर वो भी तीतर

जेल में मोबाइल फोन के इस्तेमाल की इन-इफ़ेक्‍टिव पाबन्दी हटा ली जायेगी। बताया जा रहा है कि इस तरह जब भाई लोग खुल्लम-खुल्ला बात करेंगे तो प्रशासन को उनकी प्लानिंग मालूम करने का गारण्टीड मौका मिलेगा!

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