Category: अर्थ_कृषि_उद्योग_श्रम

आदर्श ग्राम पर आदर्श सवाल : १

सच में ही एक छोटे से आदर्श की स्थापना से उसके दोहराव की सम्भावना स्वत: ही उत्पन्न हो जाती है। इसलिए ‘प्लान मोदी’ की वास्तविक सफलता योजना के इस मूल्यांकन पर निर्भर होगी कि सांसद आदर्श ग्राम योजना में ‘ग्राम’ भी और ‘आदर्श’ भी कहाँ है? और अगर कहीं है तो, यथार्थ में, कितना है? …

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क्या भोपाल में सायनाइड बम का परीक्षण किया गया था?

क्या संयन्त्र में भण्डारित रसायनों की भूमिका केवल घोषित उपयोग तक ही सीमित थी? या फिर षडयन्त्र-कारियों ने इन रसायनों के अपने स्वतन्त्र प्रभावों के अध्ययन की भी सम्भावना सोच रखी थी? और इसीलिए, टेक्सास स्थित अमरीकी सरकारी संस्थान ‘डिसीज कण्ट्रोल सेण्टर’ ने भोपाल टेलेक्स सन्देश भेज कर इलाज-विशेष का लम्बा-चौड़ा नुस्खा सुझाया था?

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किसके साथ, किसका विकास?

आईएसएम, धनबाद से पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में एमटेक और छत्तीसगढ़ कृषक बिरादरी के संयोजक प्रदीप शर्मा ने अपना एक आलेख हमें भेजा है। विषय-वस्तु की सर्व-कालीन सम-सामयिकता के कारण ही, रविवार डॉट कॉम में प्रकाशित हो चुके इस आलेख को मैं (किंचित्‌ सम्पादन के साथ) यहाँ स्थान दे रहा हूँ।

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दायित्व को निभाने की बारी अब राष्ट्र की

पीड़ित किसानों को तो यह भी पता नहीं है कि राहत के लिए आवश्यक बना दिया गया उनका दावा आगे बढ़ेगा भी या राजस्व कर्मचारियों, या फिर, सेवा सहकारी समितियों के पदाधिकारियों की मंशा की बलि चढ़ जायेगा। उन्हें प्रतीक्षा है कि कोई न कोई पहल करे और राहत-प्रदाय के उनके निवेदनों को शासन तक …

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मौसमी आपदा केवल किसानों की नहीं, समूचे राष्ट्र की आपदा है

धीरे-धीरे ही सही, सामूहिक समझ का दायरा व्यापक करते हुए किसी ठोस हल की ओर पूरी सामूहिकता के साथ कदम आगे बढ़ें क्योंकि खेतों के भविष्य पर छाया संकट केवल किसानों की नहीं अपितु समूचे राष्ट्र की आपदा है। एक बार यह समझ साफ हो जाये तो दिखलायी देने लगेगा कि खेतों के प्रति सरकारों …

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कृषक के हित साधने वाली हों कृषि-नीतियाँ

कृषि-प्रधान माने गये भारत के कृषक-चरित्र पर संकट के बादल गहराते जा रहे हैं। भरण-पोषण के लिए मोहताजी को अग्रसर कृषक और भर-पेट खाद्य की सुलभता के प्रति चिन्तित आम नागरिक, दोनों ही, विचलित हैं। विचलित नहीं हैं तो केवल वे जो या तो सम्पन्नता-जनित आधुनिकता से अटे पड़े हैं या फिर नीति-निर्धारक होने के …

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कहीं डुबा न दे खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

अर्थशास्‍त्र की सहायक प्राध्यापिका डॉ० सुषमा तिवारी ने अपना एक आलेख हमें भेजा है। विषय-वस्तु की सर्व-कालीन सम-सामयिकता के कारण ही, २९-३० अक्टूबर २०१३ को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सौजन्य में सीहोर में हुई राष्‍ट्रीय शोध-संगोष्ठी की रपट में प्रकाशित हो चुके इस आलेख को मैं (किंचित्‌ सम्पादन के साथ) यहाँ स्थान दे रहा हूँ।

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आईसीआईसीआई का मकड़-जाल : ३

Sarokar

बीती १२ जून को स्वयं-सेवी संगठन सोशल एण्ड ज्युडीशियल एक्शन ग्रुप (सजग) के अध्यक्ष डॉ० ज्योति प्रकाश ने जबलपुर में आयोजित एक पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए ऋण वसूली प्राधिकरण (DRT) की जबलपुर स्थित पीठ की पीठासीन अधिकारी पर न्याय की आत्मा पर ही कुठाराघात करने का अत्यन्त गम्भीर आरोप लगाया।

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