Category: समाज_धर्म_न्याय_शिक्षा_राजनीति

महाकाली की कथा सिखाती है गांधी की अहिन्सा का पूरा दर्शन

कथित ‘औसत समझ’ के उलट, महाकाली आदमी और आदमीयत को केन्द्र में रखने वाला प्रतीक है। और, महाकाली की गाथा में ही अहिन्सा का गांधी-वादी आदर्श अपनी पूर्णता में निखरता है।

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नये सिरे से लिखना होगा भारतीय संविधान

भारतीय संविधान के लिखे, स्वीकार किये और लागू किये जाने की प्रक्रिया के वैधानिक रूप से खोट-पूर्ण होने को स्वीकारने और इस कारण से समूची प्रक्रिया को नये सिरे से पुन: पूरा करने से कोई ऐसा महा-प्रलय नहीं आने वाला है जो सम्प्रभु भारत राष्ट्र के भौतिक और / अथवा प्रशासनिक अस्तित्व को हल्की सी …

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म० प्र० राज्य सूचना आयोग की खुली पोल

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म० प्र० राज्य सूचना आयोग आयोग पर बड़ा सवाल उठा है। गैर सरकारी सामाजिक संगठन सजग ने मुख्य सूचना आयुक्त से ही पूछ लिया है कि क्या आयोग स्वयं को देश के समस्त नियमों, कायदों, कानूनों, स्थापित व्यवस्थाओं और मर्यादाओं से ऊपर मानता है?

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म० प्र० राज्य सूचना आयोग का काला सच

Application dated 29 March 2016 for supply of Certified Copies

जो सूचना आयोग सरकारी तन्त्र में सम्पूर्ण पार-दर्शिता स्थापित करने की इकलौती जिम्मेदारी के लिए गठित हुआ है, वह स्वयं न केवल घोर अ-पारदर्शी है अपितु अ-पारदर्शिता को बढ़ावा देने के नित नये हथ-कण्डे खोजने में भी जुटा है। आयोग ने तो अधिनियम का दुरुपयोग करना तक सीख लिया है।

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यथार्थ में भारत-वंशी हैं आज के अधिकांश यूरोपीय

बीती ५ दिसम्बर को भोपाल में धर्मपाल शोध-पीठ, मध्य प्रदेश ने अपने तत्वावधान में आमन्त्रित अतिथियों के बीच एक अनौपचारिक बात-चीत का आयोजन किया था। वैश्विक ताकतों की स्व-हितैषी नीति के विशेष परिप्रेक्ष्य में विशेष रूप से भारतीय हितों को संरक्षित करने के लिए विभिन्न व्यक्तियों तथा स्थानीय संगठनों को बौद्धिक रूप से सचेत और …

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स्वयं को अधिनियम से ऊपर मानने लगा है म० प्र० राज्य सूचना आयोग

न्यायिक इतिहास का यह पहला अवसर था जब न्यायिक निराकरण का संवैधानिक अधिकार प्राप्त कोई पीठ किसी प्रकरण में अपना अन्तिम निराकरण आदेश परित कर देने के बाद, स्वत: प्रेरित और/अथवा स्फूर्त हो कर उसी प्रकरण की सुनवाई को नये सिरे से आरम्भ करने वाली थी।

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म० प्र० राज्य सूचना आयोग : सवाल वही पुराना

अधिनियम के व्यापक हित में है कि मेरे उठाये आज के सवाल पर आयोग की ओर से ही तथ्यों का कोई त्वरित स्पष्टीकरण आये। आयोग की चुप्पी का अर्थ होगा कि अधिनियम की सार्थकता म० प्र० राज्य सूचना आयोग के विद्यमान ढाँचे में सुरक्षित नहीं है। तब, महामहिम राज्यपाल महोदय पर संवैधानिक कदम उठाने का …

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राज्य सूचना आयोग : क्या स्वयं आयोग के भीतर है अधिनियम की सही समझ?

अधिनियम के बन्धन-कारी पालन की दुर्भाग्य-जनक उपेक्षा के लिए क्या केवल विभिन्न सरकारी विभाग ही जिम्मेदार रहे हैं? क्या म० प्र० राज्य सूचना आयोग की अपनी भूमिका इस जिम्मेदारी से कतई मुक्त रही है? सम्भवत:, ऐसी ही किसी सामाजिक पीड़ा के मूल्यांकन के बाद इस पुरातन उक्ति ने जन्म लिया था कि ‘पर उपदेश, कुशल …

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