Category: समाज_धर्म_न्याय_शिक्षा_राजनीति

राज्य सूचना आयोग : क्या स्वयं आयोग के भीतर है अधिनियम की सही समझ?

अधिनियम के बन्धन-कारी पालन की दुर्भाग्य-जनक उपेक्षा के लिए क्या केवल विभिन्न सरकारी विभाग ही जिम्मेदार रहे हैं? क्या म० प्र० राज्य सूचना आयोग की अपनी भूमिका इस जिम्मेदारी से कतई मुक्त रही है? सम्भवत:, ऐसी ही किसी सामाजिक पीड़ा के मूल्यांकन के बाद इस पुरातन उक्ति ने जन्म लिया था कि ‘पर उपदेश, कुशल …

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सूचना आयोग से पलट-सवाल

खबर है कि आयोग के एक फैसले में कहा गया है कि अधिकारियों को अधिनियम समझ नहीं है। ऐसे में एक पलट-सवाल करने की सूझी है — क्या आयोग के अपने ही अधिकारियों में अधिनियम की ठीक-ठीक समझ है? यह उलट-सवाल इसलिए कि मुझे, और आयोग की अन्तर्दशा से अच्छी तरह परिचितों को भी, इसके …

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राज्य सूचना आयोग : लोक अदालत के नाम पर अधिनियम से ही जाल-साजी

लोक अदालत के नाम पर सूचना आयोग द्वारा केवल आवेदकों से ही नहीं बल्कि स्वयं सूचना का अधिकार अधिनियम से भी जाल-साजी की जा रही है। अधिनियम द्वारा निर्धारित सु-स्पष्ट वैधानिक प्रक्रिया को लोक अदालतों में नहीं, आयोग की नियमित अपीली सुनवाइयों के माध्यम से ही पूरा किया जा सकता है।

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यह कैसी लोक अदालत?

क्या यह सम्भव है कि दो पक्षों के बीच चल रहे किसी वैधानिक/न्यायिक विवाद की सुनवाई किसी लोक अदालत में उस स्थिति में भी पूरी कर ली जाये (और फैसला भी सुना दिया जाये) जब उस विवाद के अपीलकर्ता ने अपने प्रकरण की सुनवाई उस लोक अदालत में करने की सहमति दी ही नहीं हो?

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म० प्र० राज्य सूचना आयोग की खोखली सफाई

सजग और राष्ट्रीय जागरण मंच ने बीती ४ जून को उसके द्वारा अपनाई जा रही घोर अपारदर्शिता के विरोध में म० प्र० राज्य सूचना आयोग को जो ज्ञापन दिया था उससे आयोग में हड़कम्प मचने के संकेत आने लगे हैं। आयोग बैक पुट पर है।

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अपनी कार्य-शैली को तत्काल प्रभाव से पार-दर्शी बनाये आयोग

स्वयं राज्य सूचना आयोग ही जब अधिनियम के अन्तर्गत् अपने बन्धनकारी दायित्व की उपेक्षा कर रहा है तो कोई यह अपेक्षा कैसे कर सकता है कि वह प्रदेश के विभिन्न लोक-प्राधिकरणों द्वारा अपने कार्यालयों में इसके पालन की निगरानी करने जैसी जिम्मेदारी का सचमुच ही निर्वाह करता होगा?

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क्या संदिग्ध है सूचना-प्रदाय में सूचना आयुक्त की भूमिका?

स्वयं आयुक्त यह कहते हुए देखे गये हैं कि आदेश पारित करने के बाद से उनको अपनी जान का खतरा दिखने लगा है! सवाल यह है कि जो कोई भी धमकी दे रहा है वह सीधे-सीधे सूचना आयुक्त से इतना नाराज क्यों है? और, जानकारी माँग कर मामले को खोद निकालने वाले आवेदक को उसने …

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केजरी ‘जंग’ : केवल अहं की लड़ाई नहीं

केजरीवाल एक नये किस्म की अराजकता के बीज बो रहे हैं। देश की सम्प्रभुता को चोटिल कर एक क्षत्रप सम्प्रभु सत्ता के निर्माण की एक नयी सोच दे रहे हैं। वे शायद इसे दिल्ली के बाहर भी विस्तार देने का इरादा रखते हैं। कहीं यह देश को एक नये किस्म के नक्सल-वाद की ओर बढ़ाने …

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