Category: विज्ञान_स्वास्थ्य

कोविड-१९ बनाम महामारी : कथ्य-२

Sarokar

आयुर्वेद पीड़ित व्यक्ति के भौतिक (Physical) अवलोकनों से प्राप्त होने वाली जानकारियों के आधार पर अलग-अलग दोषों में अलग-अलग भौतिक सुधारों को अपने उपचार का लक्ष्य बनाती है और तदनुसार ही अपनी औषधि निर्धारित करती है। जबकि होमियोपैथी व्यक्ति-विशेष से सम्बन्धित दैहिक (Phisiological) सूचनाओं का मूल्यांकन कर, और फिर अवचेतन में विलुप्त-प्राय हो चुकी इन दैहिक क्षमताओं को पुनर्जागृत कर, उन्हें ही सम्बन्धित व्यक्ति का समग्रित उपचार करने की प्रेरणा देती है। Continue reading

कोविड-१९ बनाम महामारी : कथ्य-१

Sarokar

वैसे तो इसमें अन्तिम विजय मानव की ही होगी; किन्तु, उसकी यह विजय सदा स-शर्त रहेगी — विषाणु का समूल नाश कभी नहीं होगा। क्योंकि, ऐसे किन्हीं भी प्रयासों से विनष्ट होने से बच रहे विषाणु स्वयं को परिवर्धित कर अपनी प्रकार के भविष्य के समूहों को ऐसे प्रत्येक प्रयास-विशेष के प्रति पूरी तरह से प्रतिरोधी बना लेंगे। सरल शब्दों में, मानव तथा विषाणु के बीच अस्तित्व का ऐसा सन्तुलन सदा बना रहेगा जिसका पलड़ा एक सीमा तक मनुष्य के पक्ष में झुका होगा।
Continue reading

कोविड-१९ बनाम महामारी : तथ्य

Sarokar

परम्परा-वादी विज्ञानियों के लिये उनके द्वारा परिभाषित जीवों से परे जीवन का कोई और अस्तित्व नहीं है। उनकी यह नकारात्मकता चिकित्सा-जगत्‌ का एक ऐसा बड़ा गड्ढा है जिसमें स्वास्थ्य और जीवन-रक्षा की व्यापक सम्भावनाएँ दफ़न हो जाती हैं।
Continue reading

अब दूध में डिटर्जेण्ट

Sarokar

खाद्य व पेय सामग्रियों के उत्पादकों-विक्रेताओं को कानूनी संरक्षण देने के लिए ‘सुरक्षित’ सीमा का एक नया, बाजार-वादी, मुहावरा गढ़ लिया गया है। इस और इस जैसे सारे मुहावरों का तकनीकी पेंच यह है कि ऐसे सारे उत्पादनों के अपने आप में अकेले अथवा सम्मिलित रूप से ग्रहण करने की ‘सुरक्षित’ सीमा क्या है, इसका उल्लेख कहीं नहीं होता है। Continue reading

दो मिनिट में नूडल : जीवन भर का टण्टा

Sarokar

सच है कि मोनोसोडियम ग्लूटामेट प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। और इस अर्थ में यह एक सुरक्षित खाद्य-तत्व है। किन्तु ऊपर से मिलाये जाने पर यह मष्तिष्क को नुकसान पहुँचा सकता है। ठीक वैसे ही जैसे कोकीन प्राकृतिक तत्व तो है लेकिन कोका पत्तियों से निकाला गया विशुद्ध कोकीन मानव-स्वास्थ्य के लिए महा घातक है। Continue reading

Homoeopathy, Molecular Strain Theory, Mythology & Quantum theory

Ateet Ka Jharokha

Out of all available scientific studies, quantum theory seems to have the potential to explain the intricacies involved with Hahnemannian Science. It may enable modern science to understand the mode through which the ‘Bio Prone’ media carries the ‘Drug Information’ in a true homoeopathic dose. Other schools of science lack the relevant tools.

Continue reading

Understanding the Mechanism of Preparing and Dispensing of a Homoeopathic Dose

Sarokar

As an attempt to highlight the basic ‘grey’ area of the present-day philosophy that leads it to gross misinterpretation related to the science and its application, I propose here the mechanism of both – the transformation of substance into the homoeopathic dose as also the response of the (unhealthy) organism to that. Continue reading

SCIENCE OR NOT : DOES THAT REALLY MATTER?

Sarokar

Laying the finger on the faults in Hahnemann’s philosophy does not inevitably result in putting one in the company of Hecker or Hughes. For, had that occurred while one was meditating upon the philosophy and remained beyond a fault in itself, it only furthers philosopher’s cause.

Continue reading