म० प्र० राज्य सूचना आयोग की खोखली सफाई

Sarokar

सजग और राष्ट्रीय जागरण मंच ने बीती ४ जून को उसके द्वारा अपनाई जा रही घोर अपारदर्शिता के विरोध में म० प्र० राज्य सूचना आयोग को जो ज्ञापन दिया था उससे आयोग में हड़कम्प मचने के संकेत आने लगे हैं। आयोग बैक पुट पर है। Continue reading

अपनी कार्य-शैली को तत्काल प्रभाव से पार-दर्शी बनाये आयोग

Sarokar

स्वयं राज्य सूचना आयोग ही जब अधिनियम के अन्तर्गत् अपने बन्धनकारी दायित्व की उपेक्षा कर रहा है तो कोई यह अपेक्षा कैसे कर सकता है कि वह प्रदेश के विभिन्न लोक-प्राधिकरणों द्वारा अपने कार्यालयों में इसके पालन की निगरानी करने जैसी जिम्मेदारी का सचमुच ही निर्वाह करता होगा? Continue reading

क्या संदिग्ध है सूचना-प्रदाय में सूचना आयुक्त की भूमिका?

Bahas

स्वयं आयुक्त यह कहते हुए देखे गये हैं कि आदेश पारित करने के बाद से उनको अपनी जान का खतरा दिखने लगा है! सवाल यह है कि जो कोई भी धमकी दे रहा है वह सीधे-सीधे सूचना आयुक्त से इतना नाराज क्यों है? और, जानकारी माँग कर मामले को खोद निकालने वाले आवेदक को उसने बख्श क्यों दिया है? Continue reading

केजरी ‘जंग’ : केवल अहं की लड़ाई नहीं

Sarokar

केजरीवाल एक नये किस्म की अराजकता के बीज बो रहे हैं। देश की सम्प्रभुता को चोटिल कर एक क्षत्रप सम्प्रभु सत्ता के निर्माण की एक नयी सोच दे रहे हैं। वे शायद इसे दिल्ली के बाहर भी विस्तार देने का इरादा रखते हैं। कहीं यह देश को एक नये किस्म के नक्सल-वाद की ओर बढ़ाने का संकेत तो नहीं है? Continue reading

दो मिनिट में नूडल : जीवन भर का टण्टा

Sarokar

सच है कि मोनोसोडियम ग्लूटामेट प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। और इस अर्थ में यह एक सुरक्षित खाद्य-तत्व है। किन्तु ऊपर से मिलाये जाने पर यह मष्तिष्क को नुकसान पहुँचा सकता है। ठीक वैसे ही जैसे कोकीन प्राकृतिक तत्व तो है लेकिन कोका पत्तियों से निकाला गया विशुद्ध कोकीन मानव-स्वास्थ्य के लिए महा घातक है। Continue reading

सूचना के अधिकार को तिलांजलि देता राज्य सूचना आयोग

Sarokar

आयोग की कार्य-शैली आरम्भ से ही दूषित रही है। इसके प्रामाणिक उदाहरण भी सामने आते रहे हैं। इन्हीं प्रमाणों में कुछ ‘माननीयों’ पर लगे ‘स्वार्थ-सिद्धि’ के अत्यन्त गम्भीर आरोप भी सामने आ चुके हैं। जिन पर आरोप लगे हैं, उनमें से अनेक के पास स्वयं को निर्दोष प्रमाणित करने लायक जमीन भी उपलब्ध नहीं है। Continue reading

बलात्कार-पीड़िता की पहचान

Bahas

बहस में कूदे तमाम राजनैतिक दलों और उनके धुरन्धरों को समझना होगा कि आईपीसी की धारा २२८-ए यौन-प्रताड़ित को उसके द्वारा भोगी जा चुकी प्रताड़ना से आगे की सामाजिक प्रताड़ना से संरक्षित करने के लिए जोड़ी गयी थी, उसे अपने नैसर्गिक अधिकारों से वंचित करने के लिए नहीं। Continue reading

‘कुत्ता-न्याय’

Twarit

जानते हैं, तेज रफ़्तार निकलते वाहनों के पीछे सड़क के कुत्ते ऐसे क्यों भौंकते-दौड़ते हैं जैसे ड्राइवर को काट कर ही छोड़ेंगे? दरअसल, उनमें से किसी ना किसी के किसी ना किसी नातेदार को तेज रफ़्तार वाहनों ने कुचल कर मारा हुआ होता है। Continue reading