डॉक्टर गलत परन्तु ज्योतिषी ठीक!

Twarit

उद्धृत खबर सही हो या गलत, समाचार-पत्र में प्रकाशित टिप्पणी समाज को भटकाव के जोखिम की चौखट पर खड़ा कर रही है। क्योंकि करने वाला नहीं, करने वाले की नीयत ही तय करती है कि कोई कर्म उचित है अथवा अनुचित। प्रकाशित हुई खबर का खण्डन कितनी निगाहों से गुजरेगा? समाज का सारा का सारा असमंजस इसी एक बिन्दु पर केन्द्रित है। Continue reading

मौसमी आपदा केवल किसानों की नहीं, समूचे राष्ट्र की आपदा है

Sarokar

धीरे-धीरे ही सही, सामूहिक समझ का दायरा व्यापक करते हुए किसी ठोस हल की ओर पूरी सामूहिकता के साथ कदम आगे बढ़ें क्योंकि खेतों के भविष्य पर छाया संकट केवल किसानों की नहीं अपितु समूचे राष्ट्र की आपदा है। एक बार यह समझ साफ हो जाये तो दिखलायी देने लगेगा कि खेतों के प्रति सरकारों का यथार्थ दायित्व क्या हो? और, समाज का भी। Continue reading

Homoeopathy, Molecular Strain Theory, Mythology & Quantum theory

Ateet Ka Jharokha

Out of all available scientific studies, quantum theory seems to have the potential to explain the intricacies involved with Hahnemannian Science. It may enable modern science to understand the mode through which the ‘Bio Prone’ media carries the ‘Drug Information’ in a true homoeopathic dose. Other schools of science lack the relevant tools.

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कृषक के हित साधने वाली हों कृषि-नीतियाँ

Sarokar

कृषि-प्रधान माने गये भारत के कृषक-चरित्र पर संकट के बादल गहराते जा रहे हैं। भरण-पोषण के लिए मोहताजी को अग्रसर कृषक और भर-पेट खाद्य की सुलभता के प्रति चिन्तित आम नागरिक, दोनों ही, विचलित हैं। विचलित नहीं हैं तो केवल वे जो या तो सम्पन्नता-जनित आधुनिकता से अटे पड़े हैं या फिर नीति-निर्धारक होने के घमण्ड से चूर हैं। Continue reading

कहीं डुबा न दे खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

Atithi-Vichar

अर्थशास्‍त्र की सहायक प्राध्यापिका डॉ० सुषमा तिवारी ने अपना एक आलेख हमें भेजा है। विषय-वस्तु की सर्व-कालीन सम-सामयिकता के कारण ही, २९-३० अक्टूबर २०१३ को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सौजन्य में सीहोर में हुई राष्‍ट्रीय शोध-संगोष्ठी की रपट में प्रकाशित हो चुके इस आलेख को मैं (किंचित्‌ सम्पादन के साथ) यहाँ स्थान दे रहा हूँ। Continue reading

राष्‍ट्र-भाषा हिन्दी के प्रति मीडिया का दायित्‍व

Bahas

पत्र-कारिता और मीडिया की सचाइयाँ परस्पर भिन्न हैं। यह भिन्नता इस व्यवहारिक सचाई से समझी जा सकती है कि ‘पत्र-कारिता’ की प्रतिष्‍ठा एक सामाजिक धर्म की रही है जबकि ‘मीडिया’ की आज की औसत पहचान पत्र-कारिता के सहारे व्यावसायिक हितों की पूर्ति करने वाले एक संस्थान के पर्याय की है। Continue reading

नीतियों के साथ नीयत की शुचिता भी दिखानी होगी

Twarit

मोदी-सरकार के पहले आम बजट पर सारे विरोधी एक सुर में चीख रहे हैं कि लॉली-पॉप स्वादिष्ट नहीं निकला। चुनाव की भीषण पराजय से अभी तक हाँफ रही कांग्रेस और उसकी क्वीन कह रही हैं कि बजट उनकी दु:ख-दायी प्रति-कृति भर है। दु:ख-दायी इसलिए कि उन्होंने मोदी से बड़ी-बड़ी आशाएँ की थीं! Continue reading

बहुत विस्तरित है ‘व्यापम’ घोटाले की आँच

Sarokar

कुख्यात हुए ‘व्यापम घोटाले’ को लेकर म० प्र० प्रदेश के पूर्व मुख्य मन्त्री दिविजय सिंह ने प्रदेश के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को जो पत्र लिखा न्यायालय ने उसे पत्र-याचिका के रूप में विचार के लिए स्वीकार लिया है। यों, पत्र में सरकारी तन्त्र पर बहुत गम्भीर प्रश्न हैं किन्तु न्यायालय की उँगली स्वयं उन पर भी उठ सकती है। Continue reading